यह काले भूरे रंग का रसचूसक कीट (Sucking pest) है, जो गेहूं, चना, मसूर, धान आदि फसलों की शुरुआती
अवस्था पर जड़ों पर आक्रमण (damage) करता है| यह insect जड़ के आसपास रहकर उससे रस चूसने लगता है, जिससे पौधा कमजोर हो जाता है|
पहचान के उपाय (Root Aphid identification)👇
इससे अधिक प्रभावित पौधों की
पत्तियाँ पीले रंग की हो जाती है| खेत में फसल धीरे धीरे पीली दिखाई देती है| पौधे को उखाड़ कर देखने पर इसकी जड़ों में यह काले
भूरे रंग का कीट साफ दिखाई देता है| इसकी समस्या उन क्षेत्रों में दिखाई देती है जहां
तापमान और नमी अधिक होती है| देश में दक्षिण मध्यप्रदेश और उसके आसपास का क्षेत्र
इस कीट से अधिक प्रभावी रहता है| इसके अलावा अगेती बुवाई यानि 15 अक्तूबर से पहले गेहूं की बुवाई करने पर भी इस जड़ माहु कीट का प्रकोप अधिक दिखाई देता है|
कीट के नियंत्रण के उपाय (Root Aphid Control Measures)👇
जड़ माहु को कई तरीको और कीटनाशी से नियंत्रित कर सकते है| जिसमें सबसे पहला है स्प्रे के माध्यम से बात करे तो .....इसमें थायोमेथोसोम (Thiamethoxam 25% WG) को 80 ग्राम या Imidacloprid 17.8% SL 100 ml (मिली लीटर) या फिर Fipronil 5% SC @ 500 ml प्रति 200 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ खेत में स्प्रे कर दे| क्योंकि ये कीटनाशी (Insecticides) systemic है इसलिए पूरे पौधे से मौजूद अन्य कीटों को भी नष्ट करती है| स्प्रे करते समय जमीन में नमी होना आवश्यक है,यह बात ध्यान रखे|
इसके अलावा खाद देते समय भी जड़ माहु का नियंत्रण किया जा सकता है| इसके लिए, 50 किलो बालू रेत या
यूरिया के साथ 500 ml फिप्रोनिल 5 एससी या 250 ml थायोमेथोक्सोम 30 FS या 200 ml क्लोरोपायरिफोस 50
ईसी या फिर 100 ग्राम Fipronil 40 + imidacloprid 40 WG कीटनाशी को अच्छी तरह से मिलाकर एक एकड़ की दर से खेत में बिखेर
दे और उसके तुरंत बाद सिंचाई कर दे| जहां यह समस्या हर साल देखी जाते है वहाँ हर सिंचाई के बाद
क्लोरोपायरिफोस कीटनाशी का प्रयोग करना चाहिए|
आपका कोई भी सुझाव या जानकारी सहृदय आमंत्रित है| कमेन्ट करके जरूर बताए ....धन्यवाद🙏
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